Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal: दिल्ली शराब नीति मामले में बड़ा फैसला आया। इस फैसले से आम आदमी पार्टी ने खुशहाली का माहौल है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है। इसके साथ, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है क‍ि उन्‍हें 2 जून को सरेंडर करना होगा। बता दें कि CM केजरीवाल को 1 जून तक की अंतरिम जमानत दी गई है। CM केजरीवाल आज ही तिहाड़ जेल से बाहर आ जाएंगे, नहीं तो उन्हें शनिवार, 11 मई तक का इंतजार करना होगा।

40 दिन तिहाड़ में बंद थे केजरीवाल

केजरीवाल दिल्ली शराब नीति मामले में 40 दिन यानी 1अप्रैल से तिहाड़ जेल में बंद हैं। अदालत ने दोपहर 2 बजे एक लाइन में फैसला सुनाया। आज शाम तक वे जेल से बाहर आ सकते हैं। हालांकि, उनके वकील ने 4 जून तक की रिहाई का अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया 1 जून को खत्म हो जाएगी।

मिल रही जानकारी के अनुसार अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का आर्डर ट्रायल कोर्ट में भेजा जाएगा। फिर ट्रायल कोर्ट से रिलीज आर्डर तिहाड़ जेल प्रशासन को भेजा जाएगा। इसके बाद रिलीज किया जाएगा अरविंद केजरीवाल को। खास बात ये है कि तिहाड़ जेल में रोजाना जितने भी रिलीज आर्डर आते है उसका निपटारा लगभग 1 घण्टे में हो जाता है। ऐसे में पूरी उम्मीद है आज ही अरविंद केजरीवाल जेल से रिहा हो जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा.. कोई समान लाइन नहीं खींचनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने अंतर‍िम जमानत देते हुए कहा क‍ि केजरीवाल को डेढ़ साल तक गिरफ्तार नहीं किया गया। ऐसे में 21 दिनों की जमानत से कुछ नहीं होगा। अरविंद केजरीवाल को पहले भी गिरफ्तार किया जा सकता था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केजरीवाल को दो जून को सरेंडर करना पड़ेगा। हमें कोई समान लाइन नहीं खींचनी चाहिए। उन्हें मार्च में गिरफ़्तार किया गया था और गिरफ़्तारी पहले या बाद में भी हो सकती थी।

AAP ने सभी संकल्प सभाएं रद्द की

केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिलने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में होने वाली सभी संकल्प सभाएं रद्द कर दी हैं। अब पार्टी नई प्रचार योजना बनाएगी और जल्द ही इसका ऐलान किया जाएगा।

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क्या होती है अंतरिम जमानत (Interim bail) ?

यह मूल रूप से छोटी अवधि के लिए और नियमित या अग्रिम जमानत आवेदन की सुनवाई या अंतिम निपटान से पहले होता है।
नियमित या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते समय अंतरिम जमानत महत्वपूर्ण है। जमानत के लिए अदालत में जाने के लिए कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता होती है जैसे कि आरोप पत्र या केस डायरी आदि। ताकि, वे विवेकपूर्वक आवेदन पर निर्णय ले सकें। लेकिन इस प्रक्रिया के लिए समय की आवश्यकता होती है और आरोपी को तब तक कानूनी हिरासत में रहना पड़ता है जब तक कि अदालत को दस्तावेज नहीं मिल जाते और वह जमानत अर्जी पर फैसला नहीं कर लेती।

लेकिन अंतरिम जमानत के अनुसार, कोई आरोपी अदालत को दस्तावेज आदि मिलने तक जेल से बचने के लिए इसके लिए आवेदन कर सकता है। इस प्रकार, अंतरिम जमानत कम समय अवधि के लिए एक अस्थायी जमानत है जिसके दौरान अदालत नियमित या अग्रिम जमानत आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए दस्तावेजों को बुला सकती है। यह कुछ शर्तों पर दिया जाता है।

● यदि अवधि समाप्त हो जाती है और अदालत विशेष परिस्थितियों के कारण समय बढ़ाना उचित समझती है तो अंतरिम जमानत को अधिक समय के लिए बढ़ाया जा सकता है।
● अंतरिम जमानत विशेष रूप से किसी आरोपी की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए एक उपाय है। साथ ही, अदालत के पास ऐसे व्यक्ति को जमानत देने की अंतर्निहित शक्ति है जिसकी जमानत याचिका अभी भी निपटान के लिए लंबित है
● अंतरिम जमानत देना न्यायालय का विवेक है लेकिन निर्णय ठोस और कानून द्वारा निर्देशित होने चाहिए।

अंतरिम और नियमित जमानत में क्या अंतर है?

गिरफ्तार होने के बाद एक व्यक्ति नियमित जमानत का अनुरोध करता है। उसे जमानत मांगनी चाहिए क्योंकि उसे पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और वह उनकी हिरासत में है। एक अदालत अंतरिम जमानत जारी कर सकती है, जो अस्थायी जमानत के समान है, जबकि अग्रिम जमानत या नियमित जमानत के लिए आपके आवेदन पर कार्रवाई की जा रही है।

अंतरिम जमानत (Interim bail) पर कानून का मामला

सुखवंत सिंह एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य (2009) 7 एससीसी 559, इस मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अंतरिम जमानत (Interim bail) विशेष रूप से एक आरोपी की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए एक उपाय है। साथ ही, अदालत के पास ऐसे व्यक्ति को जमानत देने की अंतर्निहित शक्ति है जिसकी जमानत याचिका अभी भी निपटान के लिए लंबित है।

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