Kanpur: कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत अक्सर एक छोटे से शब्द या इशारे से हो जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ कानपुर में, जहां जिलाधिकारी की एक डांट ने न केवल एक व्यक्ति की जिंदगी बदल दी, बल्कि छह और परिवारों में खुशियों की नई लहर दौड़ा दी। यह कहानी है ई-रिक्शा वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार की, जिन्हें पान मसाला की लत थी और उनका पूरा परिवार इससे परेशान था।
बैठक में हुई बदलाव की शुरुआत
यह घटना ई-रिक्शा नियमितीकरण को लेकर आयोजित एक बैठक के दौरान हुई। बैठक में विनोद कुमार ने जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के सामने अपनी निजी समस्या रखी। डीएम ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना, लेकिन विनोद के पान मसाला खाने की आदत से खिन्न होकर उन्होंने सख्ती से कहा —”पहले पान मसाला छोड़िए, फिर बात होगी।” बस, यह एक वाक्य विनोद कुमार की जिंदगी की दिशा बदलने वाला बन गया।
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आदत छोड़ने का संकल्प और समाज में बदलाव
विनोद कुमार ने उसी दिन से पान मसाला छोड़ने का संकल्प लिया और उसे निभाया भी। सिर्फ खुद ही नहीं, उन्होंने अपने जैसे 6 अन्य ई-रिक्शा चालकों को भी समझा-बुझाकर पान मसाला की लत से छुटकारा दिला दिया। उन्होंने बताया कि:
“मेरी बेटी अब बहुत खुश है। घर का माहौल पहले से ज्यादा अच्छा है। पहले घरवाले कई सालों से पान मसाला छोड़ने को कहते थे, लेकिन अब जाकर लत छूटी।”
डीएम ने सराहा, कहा – समाज को दिशा देता है ऐसा बदलाव
विनोद कुमार अपनी उपलब्धि की जानकारी देने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और डीएम से मिले। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने उनके इस कदम की सराहना करते हुए कहा:
“जब कोई व्यक्ति खुद को बदलता है, तो उसका असर केवल उस व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज को भी नई दिशा देता है। इच्छाशक्ति से कोई भी बुरी आदत छोड़ी जा सकती है।”
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इस प्रेरणादायक बदलाव का महत्व
- 7 परिवारों की खुशहाल शुरुआत एक सख्त मगर सही सलाह से हुई।
- नशा मुक्ति की दिशा में प्रशासन की भूमिका का उदाहरण।
- पान मसाला जैसी हानिकारक आदतें यदि छोड़ी जाएं, तो इससे न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि परिवार और समाज में भी सुधार आता है।
