Gorakhpur: पार्क रोड के रहने वाले 40 वर्षीय प्रतिष्ठित व्यवसाई अम्बरीश श्रीवास्तव की रहस्यमय परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई। शुक्रवार सुबह कुसम्ही स्थित उनके फार्महाउस पर हुई इस घटना के बाद से पूरे इलाके और उनके करीबियों में शोक की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार शाम जब पोस्टमार्टम के बाद अम्बरीश का शव उनके आवास पर पहुंचा, तो वहां का मंजर देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया।
फोन पर बात करते हुए तीसरी मंजिल पर गए, फिर आई गोली की आवाज
पुलिस और फार्महाउस के कर्मचारियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, अम्बरीश श्रीवास्तव शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे अकेले ही कुसम्ही स्थित अपने फार्महाउस पहुंचे थे। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अमूमन शांत रहने वाले अम्बरीश उस वक्त कुछ परेशान और मानसिक रूप से व्यथित (डिस्टर्ब) नजर आ रहे थे।
फार्महाउस पर पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले वहां बंधी गायों को देखा और कर्मचारियों से कुछ देर सामान्य बातचीत की। इसके बाद, वह अपने मोबाइल पर किसी से बात करने लगे। फोन पर लगातार बात करते हुए वह धीरे-धीरे मकान की तीसरी मंजिल (छत) की ओर बढ़ गए। कर्मचारियों के मुताबिक, यह उनकी आखिरी बातचीत थी (जो संभवतः परिवार के ही किसी सदस्य से हो रही थी)। इसके कुछ ही देर बाद छत से गोली चलने की तड़तड़ाहट गूंजी।
आवाज सुनकर जब कर्मचारी भागते हुए ऊपर पहुंचे, तो अम्बरीश लहूलुहान हालत में पड़े थे। पास ही उनकी लाइसेंसी पिस्टल पड़ी थी। गोली लगने से मौके पर ही उनकी मौत हो चुकी थी। बता दें कि उन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही इस पिस्टल का लाइसेंस मिला था और वह अक्सर इसे अपने साथ रखते थे।
“मां रोओ मत, मैं संभालूंगा पूरा परिवार…” मासूम ईशान के शब्दों से रो पड़ा हर शख्स
शुक्रवार शाम करीब चार बजे जब पुलिसिया कार्रवाई और पोस्टमार्टम के बाद अम्बरीश का शव उनके पार्क रोड स्थित आवास पर लाया गया, तो वहां चीख-पुकार मच गई। बुजुर्ग पिता अपने जवान बेटे के शव को देखकर फफक-फफक कर रो पड़े, जिन्हें संभालना मुश्किल हो रहा था। इस बेहद गमगीन माहौल के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद सैकड़ों लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया।
बड़े बेटे का ढांढस: अंतिम संस्कार के लिए शव को राजघाट ले जाने की तैयारी चल रही थी। अम्बरीश की पत्नी दीपाली अपनी ननद पारूल श्रीवास्तव से लिपटकर बदहवास हालत में रो रही थीं और बार-बार कह रही थीं कि “अब मेरा और बच्चों का क्या होगा?”
अपनी मां को इस तरह टूटते देख, उनके बड़े बेटे ईशान ने रोती हुई मां का हाथ कसकर थाम लिया। मासूम ईशान ने रुंधे गले से कहा- “मत रो मां, मैं हूं ना… मैं पूरा परिवार संभालूंगा, पापा से बहुत कुछ सीखा है।” 12 साल के बच्चे के मुंह से यह परिपक्व और भावुक बात सुनते ही वहां खड़े रिश्तेदारों, पड़ोसियों और बुजुर्ग दादा की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। दादा ने तुरंत तड़पकर अपने पोते को सीने से लगा लिया।
छोटे बेटे की नासमझी: वहीं, अम्बरीश का छोटा बेटा वीर इस पूरी बात से अनजान, अपने चाचा नितिन से लिपटकर सिसक रहा था। वह बार-बार अपने चाचा का कुर्ता खींचकर पूछ रहा था “पापा को क्या हुआ? उन्हें उठाइए न चाचा, वह बोल क्यों नहीं रहे?” भतीजे की यह मासूम गुहार सुनकर चाचा नितिन खुद को रोक नहीं पाए और उसे गले लगाकर फूट-फूट कर रोने लगे।
जून में था शादी की सालगिरह और जन्मदिन का दोहरा जश्न
अम्बरीश के चले जाने से उनकी पत्नी दीपाली पूरी तरह टूट चुकी हैं। रोते-बिलखते हुए उन्होंने बताया कि जून का महीना इस परिवार के लिए हमेशा खुशियां लेकर आता था। जून 2012 में उन दोनों की शादी हुई थी, और इत्तेफाक से 11 जून को ही अम्बरीश का जन्मदिन भी पड़ता था। हर साल पूरा परिवार अम्बरीश का जन्मदिन और शादी की सालगिरह एक साथ बेहद धूमधाम से मनाता था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस जून से पहले ही परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ेगा।
अंतिम विदाई में उमड़ी शहर के गणमान्य लोगों की भीड़
अम्बरीश श्रीवास्तव के मिलनसार स्वभाव के कारण शहर में उनकी अच्छी पहचान थी। उनकी मौत की खबर फैलते ही पार्क रोड स्थित आवास पर ढांढस बंधाने वालों का तांता लग गया। शहर के कई प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि, छात्रनेता और सामाजिक कार्यकर्ता उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। शाम को नम आंखों और भारी मन से परिजनों व करीबियों ने राजघाट पर अम्बरीश को अंतिम विदाई दी।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है कि आखिर वह कौन सी वजह थी जिसके कारण अम्बरीश सुबह से परेशान थे और वह आखिरी फोन कॉल किसका था, जिसके तुरंत बाद यह आत्मघाती या दुखद हादसा हुआ।
