Churu Rajasthan: भारतीय वायुसेना के एक और जगुआर लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से देशभर में रक्षा विमानों की सुरक्षा और उपयोगिता को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है। यह इस वर्ष का तीसरा जगुआर हादसा है, जो मार्च में पंचकुला (हरियाणा) और अप्रैल में जामनगर (गुजरात) में हो चुकी दुर्घटनाओं के बाद हुआ।
क्या है ताजा मामला?
राजस्थान के चुरू जिले में मंगलवार को प्रशिक्षण उड़ान के दौरान एक जगुआर फाइटर जेट खेतों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान में मौजूद दोनों पायलटों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना के बाद वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (जांच) के आदेश दिए हैं।
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जगुआर विमान: एक नजर में
- सेवा में प्रवेश: 1979
- कुल संख्या: 145 विमान
- पहली खेप: 40 विमान ब्रिटेन से (SEPECAT Jaguar), शेष HAL द्वारा निर्मित
- नाम: ‘शमशेर’ – न्याय की तलवार
- भूमिका: ग्राउंड अटैक, डीप स्ट्राइक मिशन
40 साल पुराना योद्धा: अब बोझ बनता जा रहा है?
एक पूर्व जगुआर टेस्ट पायलट ने मीडिया को बताया कि “जैसे-जैसे विमान बूढ़े होते जाते हैं, उनकी तकनीकी दिक्कतें बढ़ती जाती हैं। अब जगुआर भी उसी राह पर है जिस पर कभी मिग-21 था।”
मिग-21 को ‘उड़ता ताबूत’ कहा जाने लगा था, और अब जगुआर को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं दुर्घटनाएं?
- पुराना ढांचा:
जगुआर विमानों को डिज़ाइन किए 60 साल से अधिक हो चुके हैं। भारत में इनका निर्माण 2008 तक हुआ, लेकिन आज भी इन्हें सेवा में रखा गया है। - कमजोर इंजन:
इन विमानों में लगे Rolls Royce-Turbomeca Adour Mk-811 इंजन अक्सर चर्चा में रहते हैं। ये न तो पर्याप्त गति देते हैं न ही पर्याप्त हथियार ढोने की क्षमता और नहीं ये जटिल युद्धाभ्यासों के लिए उपयुक्त हैं - दुनिया में कोई और देश नहीं चला रहा
भारत ही अब अकेला देश है जो आज भी जगुआर का इस्तेमाल कर रहा है
ब्रिटेन, फ्रांस, ओमान, नाइजीरिया, इक्वाडोर जैसे देशों ने इसे बहुत पहले हटा दिया था
क्या विकल्प है भारत के पास?
IAF ने पहले ही Tejas Mk-1A, Rafale, और भविष्य के Tejas Mk-2, AMCA जैसे विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है। लेकिन जब तक ये विमानों की संख्या में सेवा में नहीं आते, तब तक जगुआर जैसी पुरानी तकनीक ही रक्षा का भार संभाल रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि:
- जगुआर को पूरी तरह से सेवा से हटाया जाए
- वैकल्पिक विमान जल्द से जल्द लाए जाएं
- पायलटों की सुरक्षा और तकनीकी विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जाए
भारतीय वायुसेना के लिए जगुआर एक गौरवशाली इतिहास वाला विमान रहा है, जिसने कारगिल से लेकर कई युद्धाभ्यासों तक भारत की वायुशक्ति को मजबूत किया। लेकिन अब जब यह विमानों का जीवनकाल समाप्ति की ओर है और बार-बार जानलेवा हादसे सामने आ रहे हैं, तब आवश्यकता है साहसी और व्यावहारिक निर्णयों की।
