PCOS

PCOD: दुनिया में कई महिलाएं और युवा लड़कियां पीसीओएस यानी ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ से पीड़ित हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक आम समस्या है जो महिलाओं और युवतियों में पायी जाती है। इसके कारण महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन आखिर कैसे होता है ये? इसके क्या कारण है?

PCOS होने के कारण

यह समस्या विभिन्न कारणों से हो सकती है, जिसमें असंतुलित जीवनशैली, अनियमित खानपान, आनुवंशिक कारकों का प्रभाव शामिल है। PCOS के कारण हार्मोनल बदलाव, अनियमित मासिक धर्म, वजन बढ़ना, त्वचा समस्याएँ और बालों की समस्याएँ हो सकती हैं। आइए, जानते हैं PCOS को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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कंट्रोल करने के असरदार उपाय

दरअसल, पीसीओएस को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन स्वस्थ, संतुलित आहार और जीवनशैली में बदलाव जैसे कि रोज़ एक्सरसाइज करने से कण्ट्रोल किया जा सकता है। एमपीआईएल वेलनेस के निर्देशक निखिल माहेश्वरी का कहना है कि आयुर्वेद और योग से पीसीओएस को कंट्रोल करने में बेहद मददत मिलती है।

जानें आयुर्वेदिक उपाय

  • बस्ती (हर्बल एनीमा): बस्ती एनीमा की समस्या को ठीक करता है जिससे खराब वात और मल को साफ़ करने में मदद मिलती है। इससे आप स्वच्छ और स्वस्थ महसूस करते है।
  • विरेचन (हर्बल क्लींजिंग): हमारे शरीर को जहरीली चीज़ों से छुटकारा पाने की जरूरत है और इसके लिए विरेचन का उपयोग किया जाता है जैसे कि शरीर से खराब पित्त को आंत से बाहर निकालना।
  • वामन (हर्बल उल्टी): वामन एक अभ्यास है जिसका उपयोग शरीर को शुद्ध करने के लिए भी किया जाता है। वामन का मुख्य उद्देश्य उल्टी को प्रेरित करके खराब कफ से छुटकारा पाना है। वामन न केवल शरीर को डिटॉक्सीफाई करती है बल्कि पीसीओएस को नियंत्रण में रखते हुए हार्मोन को भी संतुलित करती है। खास बात ये है कि इसमें कोई दर्द नहीं होता।
  • योगिक व्यायाम: आयुर्वेदिक जीवनशैली का पालन करने में योगिक व्यायाम भी शामिल है जो पीसीओएस जैसे समस्या से निपटने में आपकी मदद करता है। निखिल माहेश्वरी कहते है कि कुछ योग आसन जैसे प्राणायाम, बटरफ्लाई पोज, भारद्वाजसन, पद्म साधना, सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन आदि पीसीओएस को नियंत्रण में रखते है साथ ही हार्मोन को भी संतुलित करते हैं।
  • स्वस्थ आहार: खाने में ज्यादा तले की बनी चीज़े, रेड मीट, या किसी भी ऐसी चीज़ को खाने से बचना चाहिए, जिसमें अधिक वसा हो। वसा शरीर में इंसुलिन को बढ़ाता है। दूसरी ओर, फाइबर से भरपूर चीज़ों का सेवन पीसीओएस को कण्ट्रोल करने में मदद कर सकता है।
    इन जड़ी-बूटियों को आजमाए
  • कचनार: कचनार पुटी के ऊतक कोशिकाओं को सिकोड़कर सूजन को कम करता है। इसके अलावा, यह वजन घटाने में सहायता करते हुए पीरियड्स के दौरान रक्त परिसंचरण को भी नियंत्रित करता है।
  • अशोक: यह एक गर्भाशय उत्तेजक जो गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाने में मदद करता है और प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखता है। साथ ही, पीरियड्स की अनियमितताओं से निपटने के लिए लिया जाता है।
  • निर्गुंडी: यह जड़ी बूटी चक्रीय मस्तालगिया से राहत दिलाने में मदद करता है जैसे कि स्तन क्षेत्र में दर्द जो ठीक पीरियड्स से पहले तेज़ हो जाता है मासिक धर्म से ठीक पहले तेज हो। इसमें एनाल्जेसिक के गुण होते हैं। निर्गुंडी पीएमएस (प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) को भी कण्ट्रोल और प्रजनन क्षमता में सुधार करता है।

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