उत्तर प्रदेश के देवरिया (Deoria ) जिले में पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदना से एक 14 साल की किशोरी की जान बच गई। किशोरी पुराना पटनवा पुल पर खड़ी होकर नदी में कूदने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान मौके पर गश्त कर रही पुलिस टीम की नजर उस पर पड़ी और समझदारी से बात करते हुए उसे बचा लिया गया।
पुल पर खड़ी होकर रो रही थी लड़की
मामला रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र का है। मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे CO नगर संजय कुमार रेड्डी और थाना प्रभारी अभिषेक यादव अपनी टीम के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे। तभी उनकी नजर पुल पर खड़ी एक बुर्का पहने रोती हुई लड़की पर पड़ी। लड़की बार-बार नीचे नदी में झांक रही थी और मौके की तलाश में थी कि कब कूद जाए।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। CO ने बातों में उलझाकर रोका, पुलिसकर्मी कूदकर बचाने पहुंचे। CO संजय कुमार रेड्डी लड़की के पास पहुंचे और शांत आवाज़ में उससे बात करना शुरू किया, ताकि वह घबराए नहीं और अपनी बात कह सके।
लड़की किसी भी कारण से बेहद मानसिक तनाव में थी और लगातार रो रही थी।
इसी दौरान, लड़की अचानक फिसल गई और पुल के किनारे बने पिलर पर लटक गई। यह देखते ही एक युवक पिलर पर कूद गया और उसे संभालने की कोशिश करने लगा। तुरंत पुलिसकर्मी भी नीचे उतरे और स्थानीय लोगों की मदद से लड़की को सुरक्षित ऊपर खींच लिया।
यह सब कुछ कुछ ही सेकंड में हुआ, और थोड़ी देरी होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। थाने में लाकर समझाया, लड़की डर से कुछ देर कुछ नहीं बोल पाई
लड़की को पुलिस थाने लाया गया।
वह बेहद डरी और मानसिक रूप से विचलित थी। महिला सिपाही आशा सरोज और सरिता यादव ने उसे धैर्य से समझाया और काउंसलिंग की। कुछ देर बाद लड़की ने अपना नाम हशमुन निशा उर्फ प्रीति (14) बताया। उसने कहा कि वह बालपुर श्रीनगर, देवरिया की रहने वाली है। उसके पिता का नाम मुहम्मद्दीन है।
चाची से बिछड़ने के बाद घबराकर उठाया कदम
लड़की ने बताया कि वह अपनी चाची चांदनी के साथ कहीं बाहर गई थी, लेकिन अचानक वह उनसे अलग हो गई। रास्ता भटकते-भटकते वह पुराना पटनवा पुल तक आ गई और घबराहट में उसने आत्महत्या का प्रयास कर लिया। परिवार बोला- वह कभी-कभी मानसिक रूप से बहुत परेशान हो जाती है। जब पुलिस ने परिवार से संपर्क किया, तो उसकी मां सलमा और परिजन थाने पहुंचे।
मां ने बताया- “हमारी बेटी कभी-कभी बिना किसी कारण बहुत परेशान हो जाती है। तेज रोने लगती है और किसी से बात नहीं करती। शायद आज भी ऐसा ही हुआ।” परिवार ने पुलिस टीम का धन्यवाद किया कि उनकी बेटी की जान बच गई। पुलिस ने बच्ची को परिवार के हवाले किया और काउंसलिंग कराने की सलाह दी
थाना प्रभारी अभिषेक यादव ने कहा- “बच्ची को मानसिक और भावनात्मक काउंसलिंग की जरूरत है। परिवार को समझाया गया है कि वह उसकी निगरानी करें और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ को दिखाएं।”
CO संजय कुमार रेड्डी बोले- ‘पुलिस सिर्फ अपराध रोकने के लिए नहीं, जान बचाने के लिए भी है’ “पुलिस का कर्तव्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं है। जनता की जान की सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। टीम ने इंसानियत दिखाते हुए बच्ची की जान बचाई।” मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
अगर पुलिस की सतर्कता में कुछ सेकंड की भी देर होती, तो एक मासूम की जान जा सकती थी। यह घटना दिखाती है कि समान्य गश्त भी बड़ी घटनाओं को रोक सकती है। अगर पुलिस संवेदनशील और सतर्क रहे।
