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Step Behavior: ऋषिकेश में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी 18-19 सितंबर से गायब थी। 24 सितम्बर को उसकी लाश एक नहर में मिली थी। प्रशासन ने जल्दबाज़ी में उसका पोस्टमॉर्टम कराकर अंतिम संस्कार करा दिया।
अब आते असली मुद्दे पर, एक अंकिता वो भी थी और एक अंकिता ये भी थी।
एक झारखंड की रहने वाली थी और दूसरी उत्तराखंड की रहने वाली।
उसकी भी हत्या हुई थी और इसकी भी हत्या हुई है। फर्क सिर्फ इतना है कि
एक नाम अंकिता सिंह था तो दूसरी का नाम अंकिता भंडारी।
उसके मरने के बाद भी लोगो में आक्रोश देखने को मिला था और इसके मौत पर भी लोगो में आक्रोश देखने को मिला। लेकिन विरोध और आक्रोश के इस तराजू में बहुत फर्क है, दोनों मामलों में बीजेपी के नेताओं और न्यूज़ चैनलों में बहुत फर्क है। आपको याद होगा कि अंकिता सिंह के हत्या के बाद कितना बवाल हुआ था। कई चैनलों पर 2-3 दिन तक लगातार डिबेट्स हुआ था। बीजेपी के सैकड़ों नेता और हजारों कार्यकर्त्ता मिलकर अंकिता सिंह को इंसाफ दिलाने के लिए कई दिनों तक मुहीम भी चलाया।

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आपको याद होगा झारखण्ड से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे एक प्राइवेट प्लेन से कपिल मिश्रा और सांसद मनोज तिवारी को लेकर दिल्ली से लगभग 1400 किलोमीटर दूर अंकिता सिंह के घर पहुंचे। अंकिता सिंह के परिवार वालों को 25 लाख का चेक भी देकर आये थे। कई दिनों तक न्यूज़ चैनलों में दंगल, हल्लाबोल, हुंकार और आर-पार जैसे प्रोग्राम में अंकिता के इंसाफ के लिए मांग उठती रही। मुझे लगता है ऐसा होना भी चाहिए, क्यों ना हो ? अगर किसी लड़की को इस तरह जलाकर मार दी जाती है तो उसके लिए इंसाफ कि लड़ाई लड़ी जानी चाहिए।

अब चलते है अंकिता भंडारी के मामले पर
क्या उत्तरखंड की बेटी अंकिता भंडारी के मामले में ऐसा देखने मिल रहा है जैसा अंकिता सिंह के मामले में देखने को मिला था। मैं कहूंगा बिलकुल नहीं। क्या वैसा मीडिया कवरेज आपको देखने को मिल रहा है जैसा अंकिता सिंह की हत्या के बाद देखने को मिल रहा था। अंकिता भंडारी के साथ उत्तराखडं के बीजेपी नेता बिनोद आर्य के दारुबाद बेटे ने दरिंदगी की उसे अपना शिकार बनाने की कोशिश की जब अंकिता नहीं झुकी तो मौत के घाट उतार दिया। लेकिन बीजेपी नेताओ की तरफ से कोई भी नेता अंकिता भंडारी के घर नहीं गया हालाँकि अंकिता भंडारी का घर दिल्ली से मात्रा 300 किलोमीटर दूर है।

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भारत में एक राष्ट्रीय महिला आयोग नाम की एक संस्था है जिसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष बीजेपी नेता रेखा शर्मा हैं। इन्होने अंकिता भंडारी के लिए एक शब्द भी नहीं लिखा। यही रेखा शर्मा दुमका की अंकिता सिंह के मामले में न्यूज़ चैनलों पर इंटरव्यू देकर हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्यवाई की मांग कर रही थी, यही नहीं महिला आयोग की एक टीम को झारखंड भेज दिया था।

अब एक बात सोचने वाली हैं अंकिता सिंह और अंकिता भंडारी की हत्या में इतना बड़ा फर्क क्यों हैं ? तो चलिए आपको इस दोनों के बिच का फर्क बताते हैं। दरअसल, अंकिता सिंह की हत्या करने वाला आरोपी शाहरुख़ मुस्लिम था जबकि अंकिता भंडारी की हत्या करने वाला आरोपी बीजेपी नेता का लड़का हैं। अंकिता सिंह के मामले में नेताओं को हिन्दू-मुस्लिम का भट्टी था जिसमे नेताओं ने खूब रोटियां सेंकी। लेकिन यहाँ तो आरोपी खुद बीजेपी नेता का लड़का है। उसका भाई भी बीजेपी में है। राज्य में बीजेपी की सरकार है। अगर ये आंदोलन करेंगे भी तो किसके लिए ? बीजेपी का नेता बीजेपी से सवाल पूछ नहीं सकता। अंकिता सिंह की हत्या और अंकिता भंडारी की हत्या मामले में बस यही फर्क है।

एक 19 साल एक लड़की महज 22 दिन पहले ऋषिकेश के एक बीजेपी नेता के बेटे के रिसोर्ट में नौकरी करने गई थी। गरीब मन-बाप की बेटी अंकिता ने 12वीं में टॉप किया था फिर होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। किसी तरह से वो नौकरी करना चाहती थी ताकि परिवार की मदद कर सके।

कुछ सवाल ऐसे भी जनका जवाब किसी के पास नहीं हैं जैसे-

  • रिसोर्ट में आने वाला वो वीआईपी कौन था?
  • किस वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने की बात हो रही थी ?
  • बीजेपी नेता के रिसोर्ट में कौन वीवीआईपी आने वाला था ?
  • पहले कौन-कौन ऐसे लोग वहां एते रहे हैं ?
  • बिना जाँच के बुलडोजर क्यों और किसके कहने पर चलाया गया ?
  • अगर ऐसा हैं तो डीएम क्यों मना कर रहे थे ?
  • क्या बुलडोजर सीएम के कहने पर चला था ?
  • बुलडोजर से सबसे पहले अंकिता के कमरों को ही क्यों तोड़ा गया ?
  • अंकिता के शव का अंतिम संस्कार जल्बाजी में क्यों किया गया ? ऐसे कई सवाल अब भी हैं जिनका जवाब नहीं मिला हैं और नहि किसी के पास हैं।

संघ से जुड़े विपिन कार्नवाल ने फेसबुक पोस्ट में लिखा
मैं इसलिए कैंडल मार्च और बाजार बंद करने में नहीं गया। जो बाप और भाई 19 साल की लड़की की कमाई खाता हो, जिसकी बहन और बेटी सुनसान जंगल की रिसोर्ट में काम करती हो, जहा अय्यासी होती हो। कांड होने के बाद जिस बाप को उसकी लड़की का जम्मू वाला फ्रेंड आकर आंखे खोलता हो। सबसे बड़ा गुनहगार तो ऐसी लड़की का बाप है जो कच्चा दूध भूखे बिल्लों के सामने रख दे। उसके लिए क्या सडकों पर चिल्लाना जो बाद में लड़की लाश भी बीच दे। हजारों भावुक भाई-बहनो को झंड कर दिया, सॉरी।
ये पोस्ट पढ़कर आपिस इंसान के घटिया मानसिकता का अंदाजा लगा सकते है। बाकि फैसला आप पर छोड़ता हूँ, पोस्ट पढ़कर कमेंट में अपनी राय का इजहार जरूर करें।

By Javed

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