देवरिया: मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा० पी०एन० सिंह ने बताया है कि जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में एवं उप जिलाधिकारी के निर्देशन में अधिशासी अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी एवं खण्ड विकास अधिकारियों की टीम द्वारा नगर पालिका / नगर पंचायतों के कैटिल कैचर लेकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में निराश्रित / छुट्टा गोवंशों को पकड़ने का अभियान चलाया गया।

ये भी पढ़िए: ओमिक्रॉन वैरियंट के संभावित खतरे के दृष्टिगत DM ने स्वास्थ्य विभाग के तैयारियों की समीक्षा

जिसके क्रम में कुल 52 गोवंश जनपद में संचालित विभिन्न गो आश्रय स्थलों यथा पिपरपाती, रायपुर चकलास- बरहज, कान्हा गो आश्रय गौरीबाजार, मझौलीराज, सलेमपुर, रावतपार रघेन-लार, घांटी-भटनी, भेडापाकड़-भाटपाररानी इत्यादि में संरक्षित किये गये। यह अभियान बीते कई माह से नियमित रूप से चलाया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 2982 निराश्रित गोवंश संरक्षित किये जा चुके है।

ये भी पढ़िए: IGRS (जनसुनवाई शिकायत प्रणाली) रैंकिंग में देवरिया को मिला प्रदेश में दसवाँ स्थान

इस अभियान के कारण सड़क पर घूम रहे छुट्टा गोवंशों की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल चुका है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषकों के खेत में भी निराश्रित गोवंश घूमते हुए कम दिखाई पड़ते है।

निराश्रित गोवंशों को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित करने के बाद विभिन्न विभागों यथा जिला पंचायत, नगर विकास पंचायत विभाग, पशुपालन विभाग द्वारा उनकी देखभाल एवं चिकित्सा जाती है। वर्तमान में ठण्ड की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में सभी गो आश्रय स्थलों को तिरपाल से ढ़कने एवं गोवंश के लिए काऊ कोट की व्यवस्था की गयी है तथा ठण्ड बढ़ने पर गो आश्रय स्थलों में अलाव जलाने के निर्देश दिये गये।

By Javed

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सोनक्षी सिन्हा और ज़ाहिर इक़बाल हुए एक दूजे के लिए, सोनाक्षी ने तश्वीरे शेयर की गौतम अडानी को कितनी सैलरी मिलती है ? जानकर चौक जाओगे लंबे समय तक AC में रहने से सिरदर्द या माइग्रेन क्यों होता है? सिर्फ तेज़ नज़र वालों के लिए है ये चैलेंज इस फोटो में तीन कमिया हैं। सिर्फ 1% लोग ही ढूंढ पाएंगे